covid 19 poem
मेरी एक स्वरचित कविता इस संकट के समय 🙏 My painting during Covid 19 इस प्रलय के काल मे, विश्व मे, भौकाल मे जात पात गौण है, बदल रहा भूगोल है, कर्म की इस आस मे, मदद के प्रयास में एक राष्ट्र एक हम, बन गया है एक वतन , राष्ट्रभक्ति से बड़ा कोई रहा नहीं है धर्म।। " वसुधा कुटुम्बकम " कर रहे हैं सब जतन सुक्ष्म से इस जीव का हो रहा है पतन, दे रहा है कोई तन , कोई दे रहा है धन हम भी एक साथ है, एक चित्त एक मन , राष्ट्रभक्ति से बड़ा कोई रहा नहीं है धर्म।। नितिन हिंगले


बहुत सुंदर आलेख, वर्तमान परिवेश में विद्यार्थी, शिक्षक और परम्परागत शिक्षण व्यवस्था पर सीधा कटाक्ष है. अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों को भी संदेश है कि वे उस कच्ची मिट्टी को सही आकार दें. उत्तम विचारों के लिए बधाई. - @ विकास
ReplyDeleteIts True sir ji
ReplyDeleteShi h sirrr....correct
ReplyDeletethanks to all of you
ReplyDeleteYes sir it's true.....
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