I am an Indian.

"मंदिर" में दाना चुग कर चिड़िया "मस्जिद" में पानी पीती हैं,
मैंने सुना है "राधा" की चुनार ,कोई "सलमा" बेगम सीती हैं ll 

एक "रफ़ी" था महफ़िल महफ़िल "रघुपति राघव" गाता था ,
एक "प्रेमचंद" बच्चों को "ईदगाह" सुनाता था ll

कभी कन्हिया की महिमा गाता "रसखान " सुनाई देता है,
औरो को दिखते होंगे " हिन्दू " और "मुसलमान"

 मुझे तो हर शख्स  भीतर "इंसान " दिखाई देता है। क्योंकि। .......
ना हिन्दू बुरा है न मुसलमान  है....
जिसका किरदार बुरा है वो "इंसान " बुरा हैं l


कवि - उज्जवल माथुर

Comments

Popular posts from this blog

covid 19 poem

BIRTH OF MY DARLING AROMA

VALUES